Friday, August 22, 2008

sarvekshan -1

आभार:-
इस सर्वेक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान देने के लिए छत्रपति शाहू जी महराज चिकित्सा विश्वविद्यालय के शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्षा, विश्व स्वस्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार से वर्ष २००५ में सम्मानित तथा विश्व स्वस्थ्य संगठन द्वारा संचालित तम्बाकू नशा उन्मूलन केन्द्र के प्रमुख, (डॉ.) रमाकांत के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं. श्री अभिषेक मिश्रा और श्री रितेश आर्य के भी आभारी हैं जिन्होंने आंकडों के एकत्रीकरण में अपना बहुमूल्य समय दिया और अमित द्विवेदी जिन्होंने इस पूरे सर्वेक्षण में अपना सहयोग प्रदान किया। हम इस सर्वेक्षण के सभी उत्तरदाताओं के आभारी हैं जिन्होंने प्रश्नों का उत्तर देने के लिए अपना बहुमूल्य समय और सहयोग देकर इस प्रयास को सफल बनाया.
पृष्ठभूमि:-
तम्बाकू विश्व में रोकी जा सकने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की तम्बाकू से इस वर्ष पचास लाख से ज्यादा लोगों की मौत होगी जो टीबी, ऐड्स तथा मलेरिया को milaakar होने वाली कुल मौतों की संख्या से भी अधिक है. यदि कठोर कदम नहीं उठाये गए तो तम्बाकू से इस शताब्दी में दस khrab लोगों kee मृत्यु का अनुमान लगाया गया है. यद्यपि तम्बाकू से होने वाली मौतें कम ही शीर्षक samaachar बन पाती हैं, परन्तु तम्बाकू के कारण हर ६ सेकंड में एक मौत होती है.
नीतियां:-
भारत में तम्बाकू से प्रतिवर्ष दस लाख से भी ज्यादा लोगों kee मृत्यु होती हैं. तम्बाकू सेवन की रोकथाम तथा tambakoo जनित रोगों, अक्षमताओं तथा मृत्यु को कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने तम्बाकू की रोकथाम के लिए एक विस्तृत नीति को lagoo किया है –sigaret तथा अन्य तम्बाकू उत्पाद अधिनियम -२००३. तब से विभिन्न नियम एवं कानून द्वारा इस अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों को प्रभावकारी रूप से lagoo किया जा रहा है. इसके अलावा विश्व की पहली जन स्वस्थ्य एवं उद्योगों की जवाबदेही के लिए बनी संधि –Framework कन्वेंशन aun Tobaco कंट्रोल पर ५ फरवरी, २००५ को भारत ने भी हस्ताक्षर किया है तथा भारतीय संसद ने इस संधि का समर्थन किया है. मौजूदा तम्बाकू नियंत्रण नीतियों के बावजूद न सिर्फ़ तम्बाकू का सेवन करने वाले बच्चों और युवाओं की संख्या बढ़ी है बल्कि तम्बाकू जनित रोगों, अक्षमताओं तथा मृत्यु की संख्या में भी महत्वपूर्ण बढ़त देखी गई है.जन swaasthya नीतियों को प्रभावकारी ढंग से lagoo करना भारत एवं विश्व के अन्य राष्ट्रों के समक्ष एक बहुत बड़ी चुनौती है.
मुद्दे:-
विश्व swaasthya संगठन के मुताबिक तम्बाकू एकमात्र ऐसा उत्पाद है जो वैध रूप से बेचा जा सकता है और इसका उपयोग करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को हानि pahunchata है- तम्बाकू का प्रयोग करने वाले सौ में से पचास की मौत निश्चित है. कम दाम, प्रभावकारी तथा भ्रामक बाजारीकरण, तम्बाकू से हानि के विषय में जागरूकता की कमी, इसके प्रयोग के विरुद्ध असंगत जन योजनाओं के कारण तम्बाकू का प्रयोग विश्व में सामान्य रूप से किया जाता है. तम्बाकू से swaasthya पर पड़ने वाले कुप्रभाव वर्षों और दशकों तक स्पष्ट रूप से पता नहीं चलते.इसलिए एक तरफ़ जब तम्बाकू का सेवन विश्व में बढ़ रहा है तभी दूसरी तरफ़ तम्बाकू जनित रोग तथा मृत्यु की अभी शुरुआत हुई है.
आगे की ranneeti :-
परन्तु हम भविष्य परिवर्तित कर सकते हैं. यह तम्बाकू महामारी विनाशकारी है लेकिन इसकी रोकथाम संभव है, इसके लिए हमें तम्बाकू के खिलाफ तुंरत सशक्त प्रयास करने चाहिए.हम इस तम्बाकू महामारी को रोक सकते हैं तथा तम्बाकू मुक्त विश्व की और अग्रसर हो सकते हैं लेकिन इसके लिए हमें अभी से ही प्रयास करने होंगे.
सर्वेक्षण :-
उद्देश्य:-
• भारत kee राष्ट्रीय तम्बाकू उपयोग सांख्यिकी को लखनऊ शहर str पर pramanit करना. • भारत में मौजूदा तम्बाकू नियंत्रण नीतियों के विषय में जागरूकता के str का पता लगना • तम्बाकू नियंत्रण अभियान, जो कम खर्चे पर काफी प्रभावकारी रहे हैं, इस पर समुदाय के लोगों का नजरिया जानना. • सर्वेक्षण के नतीजों को मीडिया के विभिन्न माध्यमों द्वारा प्रचारित करना तथा राष्ट्रीय str के सभी सरकारी और गैर सरकारी संगठनों को तम्बाकू के विषय में जागरूक करना।

विधि:-
प्रश्नावली की रचना
• प्रश्नावली की रचना के लिए हम लोगों ने विभिन्न छेत्र के लोगों की सहायता ली जैसे- शोधार्थी, सांख्यिकी के विशेषज्ञ,तम्बाकू नियंत्रण अभियान में लगे विशेषज्ञ जिससे की प्रश्नों को आसान और लोगों द्वारा आसानी से समझ में आ सकने वाला बनाया जा सके.
• १५ प्रश्नों को चार भागो में baanta गया था.(विस्तृत जानकारी के लिए अन्नेक्सुरे देखें)• उत्तरदाता के विषय में व्यक्तिगत जानकारी.• एक खंड उन उत्तरदाताओं के लिए था जो तम्बाकू का प्रयोग करते हैं, जिस से उनके तम्बाकू प्रयोग के इतिहास के बारे में जाना जा सके. • भारत में तम्बाकू नियंत्रण अधिनियम और उस से सम्बंधित नीतियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन.
आंकडों का अंकन:-प्रत्येक प्रश्न के निर्धारित कोडेड बहुविकल्प थे.
डाटा शीत
हमने माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल शीत तथा उसके सूत्र की सहायता से आंकडों को अंकित किया और उसका मूल्यांकन किया.
आंकडों का एकत्रीकरण:-
• आंकडों को एकत्र करने के लिए हमने सर्वेक्षण kartaon की एक टीम बनाई जिसमें महिला और पुरूष दोनों सम्मिलित थे.• sarvekshan kartaon के नाम:१. Aalok कुमार dwivedee . सारिका त्रिपाठी • ५ दिनों (२८ जुलाई- १ अगस्त, २००८) में ७६३ उत्तरदाताओं से आंकडे एकत्र किए गए.• सर्वेक्षण स्थान: इस सर्वेक्षण में हर तरह के लोगों को सम्मिलित करने के उद्देश्य से हमने ऐसे स्थानों को चुना जहाँ हर तरह के लोग आते हो जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और बाज़ार. • सर्वेक्षण kartaon को इस सर्वेक्षण की विधि और प्रत्येक प्रश्न की संवेदनशीलता के विषय में पूरी जानकारी दी गई जिस से उत्तरदाताओं को किसी प्रकार की हिचकिचाहट न हो. सर्वेक्षण kartao को निर्देश:- • उत्तरदाताओं को अपना परिचय देना तथा इस सर्वेक्षण के विषय में उन्हें जानकारी देना.• कोई भी प्रश्न पूछने से पहले उत्तरदाताओं की agya लेना.• उत्तरदाताओं से प्रत्येक प्रश्न विनम्रता पूर्वक poochhna जिस से की वे बिना किसी हिचकिचाहट के उत्तर दे सकें.

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